लोक पंचायत का संकल्प इतिहास के पन्नों पर दर्ज
यमुना तट पर 21 फीट ऊंची मां यमुना की प्रतिमा का अनावरण, हरिघाट का लोकार्पण और यमुना-कृष्ण मंदिर का शिलान्यास
दून वैली टाइम्स | विशेष रिपोर्ट | दीवान सिंह तोमर
कालसी/देहरादून। जौनसार-बावर की ऐतिहासिक धरती हरिपुर में गुरुवार को आस्था, संस्कृति और विरासत का एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ा। यमुना तट पर 21 फीट ऊंची मां यमुना की प्रतिमा का अनावरण, हरिघाट का लोकार्पण तथा मां यमुना-कृष्ण मंदिर का शिलान्यास किया गया। इन आयोजनों के साथ वर्ष 2016 में लोक पंचायत द्वारा देखे गए हरिपुर के पुनर्जागरण के सपने को एक नया आधार मिला।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि और क्षेत्रवासी कार्यक्रम में शामिल हुए। यमुना तट मां यमुना के जयघोष से गूंज उठा। धार्मिक आयोजन के बीच हरिपुर की ऐतिहासिक पहचान, लोक संस्कृति और विरासत को पुनः प्रमुखता से सामने लाने की चर्चा भी हुई।

2016 में देखा गया था पुनर्जागरण का सपना
लोक पंचायत के अनुसार वर्ष 2016 में हरिपुर को उसके प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक गौरव से जोड़ने की परिकल्पना सामने रखी गई थी। इसके तहत घाटों का विकास, मां यमुना की भव्य प्रतिमा, मंदिर निर्माण, यमुना आरती और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने जैसे प्रस्ताव रखे गए।
लगभग एक दशक की सामाजिक गतिविधियों और निरंतर प्रयासों के बाद इस परिकल्पना के कई प्रमुख हिस्से अब दिखाई देने लगे हैं। हरिघाट, मां यमुना की प्रतिमा और मंदिर निर्माण इसी क्रम के महत्वपूर्ण पड़ाव बताए जा रहे हैं।

इतिहास और आस्था का संगम है हरिपुर
यमुना तट पर स्थित हरिपुर को स्थानीय इतिहास और लोक परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार इसे प्राचीन समय में ‘हरि क्षेत्र’ से भी जोड़ा जाता है। हरिपुर और आसपास का क्षेत्र यमुना, टौंस, अमलावा और नौरा जैसी नदियों से जुड़ा है।
कालसी का अशोक शिलालेख, जगतग्राम के पुरातात्विक अवशेष, कल्प ऋषि से जुड़े स्थल, व्यास क्षेत्र और गंगबेवा सहित आसपास के अनेक स्थल इस भूभाग की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं।

धार्मिक पर्यटन सर्किट की संभावनाएं
लोक पंचायत की परिकल्पना में हरिपुर को यमुनोत्री यात्रा से जोड़ने की बात भी प्रमुख रही है। इसके साथ कालसी, चकराता, हनोल, लाखामंडल और जौनसार-बावर के अन्य धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को जोड़कर व्यापक पर्यटन सर्किट विकसित करने की संभावना जताई गई है।
यदि ऐसी योजना व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ती है तो इसका प्रभाव केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित न रहकर स्थानीय अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है।

स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
धार्मिक एवं पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से होमस्टे, होटल, स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प, पूजा सामग्री, स्थानीय उत्पाद, टैक्सी, परिवहन और गाइड सेवाओं जैसे क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव भविष्य में होने वाले विकास, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय लोगों की भागीदारी पर निर्भर करेगा।

सामाजिक एकता और संस्कृति पर भी जोर
लोक पंचायत के अनुसार पिछले वर्षों में प्रवासी सम्मेलन, सामाजिक सम्मेलन, प्रशिक्षण शिविर, युवा कार्यक्रम, कैरियर काउंसलिंग, धार्मिक यात्राओं और सांस्कृतिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से जौनसार-बावर के लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
वर्ष 2021 में समाल्टा में आयोजित स्याणा सम्मेलन में संगठन के अनुसार 39 खतों के सदर स्याणा और 35 खाग के उप स्याणा समेत करीब 75 स्याणाओं ने भाग लिया। इसका उद्देश्य पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और सामूहिक संवाद की स्थानीय परंपराओं को मंच देना बताया गया।

पलायन के बीच गांवों को बचाने की चुनौती
पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन की चुनौती के बीच हरिपुर को धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने से भी जुड़ी है। शिक्षा और रोजगार के लिए बाहर गए लोगों को अपनी जड़ों और गांवों से जोड़ने की दिशा में भी विभिन्न गतिविधियां संचालित किए जाने का दावा लोक पंचायत की ओर से किया गया है।
लोक पंचायत की 10 सूत्रीय परिकल्पना
- हरिद्वार की तर्ज पर हरिपुर में घाटों का विकास।
- मां यमुना की भव्य प्रतिमा की स्थापना।
- मां यमुना के भव्य मंदिर का निर्माण।
- हरिघाट पर यमुना आरती।
- स्थानीय देवताओं के कुंभ स्नान की परंपरा को बढ़ावा।
- बड़े धार्मिक मेले का आयोजन।
- यमुनोत्री यात्रा को हरिपुर से जोड़ना।
- प्राचीन हरिपुर धाम का पुनर्विकास।
- आसपास के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों का संरक्षण।
- यमुना/हरिपुर तक धार्मिक यात्राओं का विस्तार।
करीब 1500 सदस्यों से जुड़ाव का दावा
लोक पंचायत के अनुसार संगठन से करीब 1500 लोग जुड़े हैं। इनमें अधिकारी-कर्मचारी, विद्यार्थी, किसान, व्यापारी, कलाकार, पत्रकार, लेखक, इतिहासकार, शोधकर्ता और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हैं। संगठन का कहना है कि इसकी कार्यप्रणाली पारंपरिक अध्यक्ष-पदाधिकारी व्यवस्था से अलग है और सदस्य अपने स्तर पर समय तथा संसाधनों का योगदान करते हैं।
अब अगली चुनौती—स्थायी पहचान और बुनियादी सुविधाएं
हरिघाट का लोकार्पण, मां यमुना की प्रतिमा का अनावरण और यमुना-कृष्ण मंदिर का शिलान्यास हरिपुर के विकास की यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। लेकिन आगे की राह में सड़क, पार्किंग, स्वच्छता, पेयजल, यातायात, सुरक्षा, ठहरने की व्यवस्था, स्थानीय बाजार और पर्यटक सुविधाओं जैसे बुनियादी मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे।
यदि हरिपुर के धार्मिक स्थलों को कालसी, चकराता, हनोल, लाखामंडल और आसपास की ऐतिहासिक विरासत से जोड़कर समग्र पर्यटन सर्किट विकसित किया जाता है, तो इसका लाभ व्यापक क्षेत्र को मिल सकता है।
2016 से 2026—संकल्प से धरातल तक
2016 में देखी गई पुनर्जागरण की परिकल्पना अब हरिघाट, मां यमुना की 21 फीट प्रतिमा और यमुना-कृष्ण मंदिर के शिलान्यास के रूप में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।
हरिपुर की अगली कहानी अब इस बात पर निर्भर करेगी कि धार्मिक आस्था के साथ उसकी ऐतिहासिक विरासत, पर्यटन, स्थानीय रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विकास किस तरह आगे बढ़ता है।
