73 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक ने परिचित पर भरोसा कर सौंपी थी जमीन की देखरेख की जिम्मेदारी, आरोप है कि उसी ने दोबारा कर दी रजिस्ट्री
दून वैली टाइम्स | देहरादून
सेलाकुई के सेंट्रल होप टाउन क्षेत्र में एक बुजुर्ग के साथ जमीन की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जिस भूखंड को 73 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक ने वर्ष 2015 में रजिस्ट्री के माध्यम से खरीदा था, उसी जमीन को उनके परिचित ने करीब आठ वर्ष बाद दूसरे व्यक्ति को दोबारा बेच दिया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस पूरे मामले में लाखों रुपये की धोखाधड़ी की गई और भरोसे में दी गई जमीन की देखरेख की जिम्मेदारी का गलत फायदा उठाया गया।
पुलिस से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पीड़ित ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया, जिसके बाद पुलिस को मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
2015 में रजिस्ट्री कर खरीदी थी जमीन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सेंट्रल होप टाउन निवासी 73 वर्षीय तेजपाल गुप्ता ने 28 अगस्त 2015 को अपने परिचित संजय कुमार, निवासी प्रगति विहार सेलाकुई, से खसरा नंबर 1353 मिन में स्थित दो भूखंड रजिस्ट्री के माध्यम से खरीदे थे। पीड़ित पक्ष का कहना है कि रजिस्ट्री के बाद से ही वह और उनका परिवार उक्त जमीन पर काबिज हैं।
संजय कुमार से पुराने परिचय और विश्वास के चलते तेजपाल गुप्ता ने जमीन की देखरेख की जिम्मेदारी भी उसी को सौंप रखी थी। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इसी विश्वास का फायदा उठाकर आरोपी ने जमीन से संबंधित दस्तावेजों और स्थिति का दुरुपयोग किया।
आरोप: 2023 में उसी जमीन की दोबारा रजिस्ट्री
पीड़ित के मुताबिक, 9 जनवरी 2023 को संजय कुमार ने उसी भूखंड को, जिसमें बीच का रास्ता भी शामिल बताया जा रहा है, डाकरा देहरादून निवासी अनूप कुमार शर्मा के पक्ष में दोबारा बेच दिया। आरोप है कि जमीन पहले से ही तेजपाल गुप्ता के नाम रजिस्टर्ड थी और इसके बावजूद उसे दूसरे व्यक्ति के नाम किए जाने का प्रयास किया गया।
जब पीड़ित परिवार को इस कथित जालसाजी की जानकारी मिली तो उन्होंने संजय कुमार से मामले को लेकर जवाब मांगा। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उस समय आरोपी ने अपनी गलती स्वीकार करने की बात कही और कानूनी कार्रवाई नहीं करने की अपील की। साथ ही दूसरी जगह जमीन उपलब्ध कराने का भरोसा देकर मामले को टालने का प्रयास किया गया।
समझौते के नाम पर गुमराह करने का भी आरोप
पीड़ित पक्ष ने मामले में संजय सिंह पायल नाम के एक व्यक्ति की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। पीड़ित का आरोप है कि उक्त व्यक्ति स्वयं को एलआईसी एजेंट बताता है और उसने भी समझौता कराने के नाम पर उन्हें लगातार गुमराह किया।
पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपियों के साथ हुई बातचीत से संबंधित कुछ कॉल रिकॉर्डिंग भी उनके पास मौजूद हैं। उनका आरोप है कि बातचीत के दौरान जमीन के विवाद को सुलझाने और दूसरी जमीन देने का भरोसा दिया जाता रहा, लेकिन बाद में आरोपियों ने उनसे संपर्क करना बंद कर दिया।
पुलिस को दी शिकायत, कार्रवाई न होने का आरोप
पीड़ित परिवार के अनुसार, उन्होंने पूरे मामले की शिकायत 4 जुलाई 2023 को सेलाकुई थाना पुलिस के साथ-साथ देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को डाक के माध्यम से भेजी थी। शिकायत में जमीन की कथित धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि शिकायत के बाद काफी समय बीत जाने के बावजूद पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण लेने का निर्णय लिया।
न्यायालय में दाखिल किया प्रार्थना पत्र
पुलिस से कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए तेजपाल गुप्ता की ओर से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। प्रार्थना पत्र में पूरे मामले की जांच कराए जाने और संबंधित आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई।
न्यायालय के आदेश के बाद अब पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है। पुलिस जांच के दौरान जमीन की मूल रजिस्ट्री, बाद में की गई कथित रजिस्ट्री, संबंधित दस्तावेजों, कब्जे की स्थिति और आरोपों में नामजद व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाएगी।
जमीन के दस्तावेजों की जांच से खुलेगा पूरा मामला
मामले में वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और संबंधित राजस्व एवं रजिस्ट्री दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। यह भी देखा जाएगा कि वर्ष 2015 में हुई रजिस्ट्री के बाद संबंधित भूखंड का स्वामित्व किसके नाम रहा और वर्ष 2023 में उसी भूखंड की दोबारा बिक्री किस आधार पर की गई।
फिलहाल पीड़ित पक्ष ने खुद को धोखाधड़ी का शिकार बताते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और अपनी जमीन पर अधिकार सुरक्षित किए जाने की मांग की है। वहीं, पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित जमीन की दोहरी बिक्री में किन-किन लोगों की भूमिका रही और दस्तावेजों में किस स्तर पर अनियमितता की गई।
