विकासनगर | Doon Valley Times
विकासनगर की ग्राम पंचायत नवाबगढ़ की खादर बस्ती में सात वर्षीय मासूम अरमान की दर्दनाक मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। शुक्रवार को हुई यह घटना अब केवल एक हादसा नहीं रह गई है, बल्कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रही लोक निर्माण विभाग (PWD) की सड़क की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और निर्माण कार्य की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस सड़क पर भविष्य में भारी वाहनों का आवागमन होना है, वहां जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गई। बताया जा रहा है कि जहां मानकों के अनुसार KC ड्रेन या आरसीसी (कंक्रीट) ड्रेन बनाई जानी चाहिए थी, वहां केवल लगभग 10 इंच का पीवीसी पाइप डालकर पानी की निकासी की व्यवस्था कर दी गई। इसी पाइप में गिरने से मासूम अरमान की जान चली गई।
क्या DPR में था पीवीसी पाइप का प्रावधान?
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सड़क निर्माण की स्वीकृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) में वास्तव में पीवीसी पाइप लगाने का प्रावधान था? यदि था, तो किस तकनीकी मानक और किस आधार पर इसकी स्वीकृति दी गई? और यदि ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, तो आखिर किसके निर्देश पर और किसकी मिलीभगत से यह बदलाव किया गया?
निर्माण कार्य से जुड़े जानकारों का कहना है कि ऐसी सड़कों पर जल निकासी के लिए आमतौर पर मजबूत कंक्रीट की खुली नालियां (KC ड्रेन या U-ड्रेन) बनाई जाती हैं ताकि पानी का बहाव सुरक्षित रहे और दुर्घटनाओं की संभावना न हो।
गुणवत्ता की निगरानी पर भी सवाल
घटना के बाद लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य के दौरान नियमित तकनीकी निरीक्षण किया गया था, तो इतनी बड़ी खामी अधिकारियों की नजर से कैसे बच गई? क्या संबंधित जूनियर इंजीनियर, सहायक अभियंता और कार्यदायी संस्था ने मौके पर गुणवत्ता की जांच की थी? यदि निरीक्षण हुआ था तो जिम्मेदारी किसकी बनती है?
श्रेय लेने वाले अब क्यों खामोश?
जब इस सड़क निर्माण का कार्य शुरू हुआ था, तब कई जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार लोग इसका श्रेय लेने में आगे दिखाई दिए थे। लेकिन अब जब एक मासूम की जान चली गई है, तो वही लोग सार्वजनिक रूप से कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों का श्रेय लेने वाले अब जवाबदेही से क्यों बच रहे हैं?
3 करोड़ की सड़क की हो निष्पक्ष जांच
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस सड़क की पूरी निर्माण प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसमें टेंडर प्रक्रिया, स्वीकृत DPR, तकनीकी मानकों, उपयोग की गई निर्माण सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता की विशेषज्ञों से जांच कराई जाए।
यदि जांच में गुणवत्ता से समझौता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित ठेकेदार, इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
जवाबदेही तय करने की जरूरत
अरमान की मौत केवल एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि यह सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही की भी परीक्षा है। यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में ऐसी लापरवाही किसी और मासूम की जान ले सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासन और सरकार के सामने यही है—क्या अरमान की मौत को केवल एक दुर्घटना मानकर मामला बंद कर दिया जाएगा, या फिर निष्पक्ष जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी तय करते हुए सचमुच “दूध का दूध और पानी का पानी” किया जाएगा?
(नोट: घटना से जुड़े तकनीकी आरोप स्थानीय लोगों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। DPR, निर्माण मानकों और जिम्मेदारी से संबंधित तथ्यों की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही अंतिम रूप से हो सकेगी।)




