मुख्यमंत्री धामी ने किया माँ यमुना की प्रतिमा का अनावरण, हरिघाट का लोकार्पण और माँ यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास
कालसी। माँ यमुना के पावन तट पर बुधवार को श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास का भव्य संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिपुर कालसी पहुंचकर माँ यमुना की प्रतिमा का अनावरण किया तथा हरिघाट का लोकार्पण किया। इसके साथ ही उन्होंने माँ यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास भी किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर माँ यमुना के तट पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ साधु-संतों, श्रद्धालुओं और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने दीप प्रज्वलित किए। कार्यक्रम के दौरान 2100 दीपों से यमुना तट जगमगा उठा। दीपों की रोशनी और माँ यमुना के जयघोष से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

मुख्यमंत्री ने की माँ यमुना की आरती
‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के बाद माँ यमुना की भव्य आरती आयोजित की गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साधु-संतों, श्रद्धालुओं और स्थानीय जनसमूह के साथ श्रद्धापूर्वक यमुना आरती में प्रतिभाग किया। इस दौरान प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कालसी की धरती इतिहास, आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की भूमि है। माँ यमुना की प्रतिमा का अनावरण, हरिघाट का लोकार्पण और यमुना आरती जैसे आयोजन क्षेत्र की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि माँ यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास कालसी के धार्मिक एवं सांस्कृतिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

2100 दीपों से जगमगाया यमुना तट
‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने माँ यमुना के तट पर दीप प्रज्वलित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। उनके साथ साधु-संतों, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने भी दीप जलाए। एक साथ प्रज्वलित 2100 दीपों की रोशनी ने यमुना तट को भव्य और दिव्य आभा से भर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन सनातन परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने के साथ-साथ उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हनोल मास्टर प्लान के लिए ₹150 करोड़ की स्वीकृति
मुख्यमंत्री ने जौनसार-बावर क्षेत्र के विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए कहा कि हनोल मास्टर प्लान के लिए ₹150 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। इसके माध्यम से धार्मिक पर्यटन से जुड़ी अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया जाएगा और श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य आगे बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि लाखामंडल सहित जौनसार क्षेत्र के ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन स्थलों के सौंदर्यीकरण एवं विकास पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है। आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के साथ क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को विकसित किया जा रहा है।

धार्मिक पर्यटन से स्थानीय आर्थिकी को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों का विकास करना नहीं, बल्कि इन योजनाओं का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचाना भी है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से होमस्टे, स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, परिवहन, खान-पान और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
इससे स्थानीय युवाओं और उद्यमियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा जौनसार-बावर की स्थानीय आर्थिकी को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि जौनसार-बावर की विशिष्ट लोक संस्कृति, परंपराएं, वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य उत्तराखंड की अमूल्य धरोहर हैं। विकास कार्यों के साथ इन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा।

आस्था, विरासत और विकास का संगम
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड में धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों के विकास को नई गति मिली है। चारधाम के साथ प्रदेश के विभिन्न पौराणिक, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।
इसी क्रम में कालसी, हनोल, लाखामंडल और जौनसार-बावर क्षेत्र के धार्मिक एवं पर्यटन महत्व को नई पहचान देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड की आस्था और आध्यात्मिक विरासत आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जुड़कर प्रदेश के विकास और स्थानीय रोजगार का आधार बने।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में विधायक मुन्ना सिंह चौहान, सचिव रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि, अन्य जनप्रतिनिधि, विभिन्न साधु-संत तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।
