विरासत के संरक्षण के साथ होगा देहरादून का सुनियोजित विकास

शहर की 200 ऐतिहासिक परिसंपत्तियां चिन्हित, अक्टूबर में कार्यशाला के बाद तैयार होगी संरक्षण की कार्ययोजना

देहरादून, 19 सितंबर 2026। राजधानी देहरादून की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने की दिशा में प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। शहर के ऐतिहासिक एवं हेरिटेज भवनों और स्थलों के संरक्षण को लेकर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक ट्रस्ट (INTACH), द्रोणा फाउंडेशन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद रहे।

जिलाधिकारी ने कहा कि विकास और विरासत एक-दूसरे के पूरक हैं, प्रतिस्पर्धी नहीं। देहरादून का विकास केवल आधुनिक सुविधाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि शहर की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक जड़ों का संरक्षण भी समान रूप से जरूरी है। उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति वही है, जिसमें आधुनिकता के साथ ऐतिहासिक धरोहरों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जाए।

अक्टूबर में होगी विशेष कार्यशाला

जिलाधिकारी ने विरासत संरक्षण से जुड़े एनजीओ और संस्थाओं के पदाधिकारियों को हिस्टोरिक सिटी सीरीज-2026 के तहत शहर की ऐतिहासिक धरोहरों का विस्तृत दस्तावेजीकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अक्टूबर माह में विशेष कार्यशाला आयोजित कर विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जाएं।

कार्यशाला के बाद महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों का चयन कर उन्हें शहर की मास्टर प्लान और टाउन प्लानिंग में शामिल करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

डीपीआर तैयार कर शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव

जिलाधिकारी ने जिला पर्यटन अधिकारी को चयनित ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के लिए विशेषज्ञ कंसल्टेंट की सहायता से जल्द विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के निर्देश दिए। तैयार प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा।

उन्होंने कहा कि देहरादून की ऐतिहासिक धरोहरें केवल पुराने भवन या स्थल नहीं, बल्कि शहर की पहचान और भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य विरासत हैं। इनके संरक्षण के लिए प्रशासन, विशेषज्ञ संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों और आमजन की सहभागिता से समन्वित प्रयास किए जाएंगे।

शहर में 200 ऐतिहासिक परिसंपत्तियां चिन्हित

बैठक में INTACH और द्रोणा फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि शहर का व्यापक भ्रमण कर प्राथमिक स्तर पर 200 ऐतिहासिक परिसंपत्तियों को चिन्हित किया गया है। आगामी अक्टूबर में प्रस्तावित कार्यशाला के बाद इन धरोहरों के संरक्षण के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) केके मिश्रा, संयुक्त मजिस्ट्रेट हर्षिता सिंह, जिला पर्यटन विकास अधिकारी जशपाल चौहान, द्रोणा फाउंडेशन की डॉ. पारूल, एनएचआईयू के प्रबंधक दिव्यांशु सहित टाउन प्लानिंग एवं INTACH के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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