यमुना किनारे पुल नंबर-1 के पार खनन सामग्री के उठान और परिवहन को लेकर प्रशासनिक निगरानी पर सवाल
विकासनगर। यमुना नदी किनारे पुल नंबर-1 के पार कथित रूप से खनन एवं उपखनिज के उठान और परिवहन को लेकर प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आ रही गतिविधियों के अनुसार टमटम और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से खनन सामग्री के परिवहन की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि संबंधित क्षेत्र में खनन गतिविधियों की निगरानी और वाहनों के दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर की जा रही है।
उत्तराखंड में उपखनिज के परिवहन के लिए ई-रवन्ना/ई-ट्रांजिट पास की व्यवस्था लागू है। भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय के अनुसार ई-रवन्ना पोर्टल के माध्यम से खनन गतिविधियों और परिवहन संबंधी प्रक्रिया की निगरानी की जाती है।
वाहनों की जांच पर उठे सवाल
यमुना नदी क्षेत्र से निकलने वाले वाहनों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित वाहनों के पास वैध ई-रवन्ना, अनुमति, रॉयल्टी और परिवहन संबंधी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं? यदि खनन एवं उपखनिज का उठान नियमानुसार हो रहा है तो निर्धारित मात्रा, स्वीकृत क्षेत्र और परिवहन दस्तावेजों का मौके पर सत्यापन किस विभाग द्वारा किया जा रहा है?
नियमों के तहत उपखनिज के परिवहन के लिए निर्धारित पास/ई-रवन्ना व्यवस्था का पालन आवश्यक है और अधिकारियों को दस्तावेज एवं खनिज की मात्रा के सत्यापन का अधिकार है।
खनन विभाग से लेकर पुलिस प्रशासन तक जवाबदेही
मामला केवल खनन विभाग की निगरानी तक सीमित नहीं है। नदी क्षेत्र में खनन, उपखनिज के उठान और परिवहन को लेकर संबंधित विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि खनन विभाग, संबंधित एजेंसी/कंपनी, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन द्वारा इस क्षेत्र में कितनी नियमित जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि इसी वर्ष जून में विकासनगर क्षेत्र में खनन विभाग द्वारा बिना रवन्ना उपखनिज परिवहन के मामले में चार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर कार्रवाई और करीब 4.5 लाख रुपये का अर्थदंड लगाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
सरकारी राजस्व और नदी के पर्यावरण पर भी सवाल
यदि किसी क्षेत्र में निर्धारित अनुमति से अधिक या बिना वैध दस्तावेजों के उपखनिज का उठान एवं परिवहन होता है, तो इससे सरकारी राजस्व को संभावित नुकसान के साथ-साथ नदी के प्राकृतिक स्वरूप पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। हालांकि, पुल नंबर-1 क्षेत्र में वर्तमान गतिविधियां वास्तव में नियमों के अनुरूप हैं या नहीं, यह संबंधित विभाग की मौके पर जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
प्रशासन से जांच की मांग
अब सवाल यह है कि पुल नंबर-1 के पार यमुना नदी क्षेत्र में चल रही कथित खनन गतिविधियों की जांच कब होगी? क्या प्रशासन मौके पर पहुंचकर वाहनों के ई-रवन्ना, रॉयल्टी, अनुमति और खनिज की मात्रा का सत्यापन करेगा? साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि संबंधित क्षेत्र में खनन की अनुमति किसके पास है और निर्धारित सीमा के भीतर ही उपखनिज का उठान हो रहा है या नहीं।
दून वैली टाइम्स की ओर से संबंधित विभाग और जिला प्रशासन से मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष मौके पर जांच कर स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए और यदि गतिविधियां वैध हैं तो प्रशासन द्वारा इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
नोट: इस खबर में लगाए गए आरोप/आशंकाएं स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के आधार पर हैं। किसी व्यक्ति, संस्था या विभाग को दोषी ठहराने से पहले आधिकारिक जांच और दस्तावेजों का सत्यापन आवश्यक है।
