क्वानू–चकराता में सड़क सुरक्षा को लेकर विशेष पहल, 150 ग्रामीणों और विद्यार्थियों को दिया फर्स्ट रिस्पॉन्डर प्रशिक्षण

दुर्घटना के बाद घायलों को समय पर प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए परिवहन विभाग और एसडीआरएफ ने किया जागरूक

दून वैली टाइम्स | चकराता (देहरादून)

पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान घायलों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने और जानमाल के नुकसान को कम करने के उद्देश्य से क्वानू में फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। परिवहन विभाग की राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा लीड एजेंसी, एआरटीओ विकासनगर, राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) तथा युवा कल्याण समिति के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों और विद्यार्थियों को सड़क दुर्घटना के बाद प्राथमिक सहायता एवं सुरक्षित बचाव के तरीके बताए गए।

कार्यक्रम में मझगांव, मैलोथ और कोटा के ग्रामीणों के साथ राजकीय इंटर कॉलेज क्वानू के विद्यार्थियों सहित लगभग 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य दुर्घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाले स्थानीय नागरिकों को प्रशिक्षित करना था, ताकि एम्बुलेंस और बचाव दल के पहुंचने से पहले घायलों को आवश्यक सहायता मिल सके।

पर्वतीय क्षेत्रों में फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स की भूमिका अहम

पर्वतीय इलाकों में सड़क दुर्घटना होने पर दुर्गम रास्तों और दूरी के कारण राहत एवं बचाव दल को घटनास्थल तक पहुंचने में समय लग सकता है। ऐसी परिस्थितियों में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रतिभागियों को दुर्घटना के बाद त्वरित प्रतिक्रिया, सुरक्षित सहायता और आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करने की जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के दौरान दुर्घटनास्थल को सुरक्षित रखने, संबंधित एजेंसियों को सूचना देने, घायल की स्थिति का आकलन करने तथा प्रशिक्षित बचाव दल के पहुंचने तक प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने के बारे में विस्तार से समझाया गया। साथ ही, घायलों की मदद करते समय स्वयं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और घटनास्थल पर अनावश्यक भीड़ जमा नहीं होने देने पर भी जोर दिया गया।

एसडीआरएफ ने बताए बचाव एवं राहत के तरीके

एसडीआरएफ की टीम ने आपातकालीन परिस्थितियों में बचाव एवं राहत कार्यों की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। प्रतिभागियों को बताया गया कि दुर्घटना के बाद शुरुआती समय में सही निर्णय और सुरक्षित तरीके से दी गई सहायता घायल व्यक्ति की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि रीढ़ या गर्दन में चोट की आशंका होने पर घायल को अनावश्यक रूप से उठाने अथवा दूसरी जगह ले जाने से बचना चाहिए। ऐसी स्थिति में प्रशिक्षित बचावकर्मियों के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए यातायात नियमों का पालन करने, निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाने, दोपहिया वाहन पर हेलमेट पहनने, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने और नशे की स्थिति में वाहन नहीं चलाने की अपील की गई।

इसके साथ ही दुर्घटना होने पर घायलों की मदद के लिए आगे आने और समय पर आपातकालीन सेवाओं को सूचना देने की जिम्मेदारी भी समझाई गई।

ये अधिकारी एवं कर्मचारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति/लीड एजेंसी के अध्यक्ष राजीव मेहरा, आरटीओ प्रवर्तन एवं सड़क सुरक्षा देहरादून डॉ. अनीता चमोला, एआरटीओ प्रशासन मनीष तिवारी, एआरटीओ प्रवर्तन अनिल सिंह नेगी, एसडीआरएफ के सुरेश तोमर और उनकी टीम, अविनाश चौधरी सहित प्रवर्तन दल चकराता एवं सचल दल तिमली के प्रवर्तन कार्मिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संयोजन युवा कल्याण समिति अटाल के बसंत शर्मा एवं समाजसेवी सूर्यप्रताप सिंह ने किया।

सड़क सुरक्षा सबकी सामूहिक जिम्मेदारी

कार्यक्रम के माध्यम से संदेश दिया गया कि सड़क सुरक्षा केवल परिवहन विभाग या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और विद्यार्थियों को प्राथमिक सहायता एवं सुरक्षित बचाव का प्रशिक्षण देकर आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत किया जा सकता है।

परिवहन विभाग ने सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु और गंभीर चोटों की संख्या कम करने, जनभागीदारी बढ़ाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन सहायता व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के महत्व पर बल दिया।

सड़क सुरक्षा संदेश: दुर्घटना के बाद प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण है। सुरक्षित रहें, घायलों की मदद करें और समय पर आपातकालीन सेवाओं को सूचित करें।

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