देहरादून। उत्तराखंड में इन दिनों श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) से जुड़े एक विस्तृत शिकायती पत्र ने नई हलचल पैदा कर दी है। चढ़ावे से जुड़े प्रकरण के बीच सामने आए इस ज्ञापन में समिति की देशभर में फैली अरबों रुपये मूल्य की भूमि, भवनों और धर्मशालाओं पर अवैध कब्जे, बेहद कम किराये पर संपत्तियां दिए जाने, रिकॉर्ड गायब होने और वर्षों तक कार्रवाई न होने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

ज्ञापन में दावा किया गया है कि श्रद्धालुओं द्वारा भगवान बदरी विशाल के नाम पर दान की गई करोड़ों-अरबों रुपये की अचल संपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण में गंभीर लापरवाही बरती गई। आरोप है कि वर्तमान और पूर्व मंदिर समितियां इन संपत्तियों को कब्जामुक्त कराने या उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रभावी कदम नहीं उठा सकीं, जिससे दानदाताओं की भावनाओं और आस्था को ठेस पहुंची।
बदरीनाथ से जोशीमठ तक करोड़ों की संपत्तियों पर सवाल
शिकायती पत्र के अनुसार, बदरीनाथ में समिति के नाम 181 नाली 4 मुट्ठी भूमि दर्ज है। आरोप लगाया गया है कि नीलकंठ धर्मशाला, बस अड्डा, मंदिर परिसर सहित कई स्थानों की भूमि अधिक किराये पर देकर सरकारी खजाने में कम राशि जमा की जाती रही। इसके अलावा बामणी गांव में 12 नाली तथा माणा में 133 नाली 12 मुट्ठी भूमि का भी उल्लेख किया गया है।
पांडुकेश्वर में तीन भवन और 6 नाली 5 मुट्ठी भूमि का जिक्र करते हुए आरोप लगाया गया है कि जोशीमठ में चार नाली भूमि बेहद कम किराये पर लीज पर दी गई। वर्षों से किराया नहीं बढ़ाया गया, 10 कमरों का नाममात्र किराया लिया गया, 12 नाली भूमि बिना अनुमति पीडब्ल्यूडी को दे दी गई, 33 नाली भूमि का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है और 57 नाली कृषि भूमि की उपज का हिसाब भी समिति के खातों में दर्ज नहीं किया गया।
अल्मोड़ा, कर्णप्रयाग, रामनगर और हल्द्वानी की संपत्तियां भी विवादों में
ज्ञापन में नंदप्रयाग की पांच नाली भूमि, कर्णप्रयाग की दो दुकानों का बेहद कम किराया, द्वाराहाट में 13 नाली भूमि व भवन, बांसुरी सेरा (अल्मोड़ा) में करीब 190 नाली भूमि एवं भवन तथा सकनी (अल्मोड़ा) में सात नाली भूमि का भी उल्लेख किया गया है।
रामनगर (नैनीताल) में मुख्य स्थान पर स्थित लगभग 45 बीघा भूमि पर अवैध कब्जे का दावा किया गया है। हल्द्वानी में समिति के एक भवन का मात्र 100 रुपये वार्षिक किराया मिलने तथा बरेली रोड स्थित एक अन्य भवन का भी जिक्र किया गया है।
देहरादून की 62 एकड़ भूमि पर भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
ज्ञापन में दावा किया गया है कि देहरादून के डोभालवाला क्षेत्र में समिति की लगभग 62 एकड़ भूमि है, जिसकी कीमत अरबों रुपये बताई गई है। आरोप है कि इस भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए वर्तमान और पूर्व मंदिर समितियों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
इसके अलावा पौड़ी के कोटद्वार रोड स्थित दो मंजिला भवन तथा सिविल लाइन धर्मशाला से लगी दो नाली भूमि पर भी कथित कब्जे के आरोप लगाए गए हैं।
केदारनाथ, ऊखीमठ और रुद्रप्रयाग क्षेत्र की भूमि पर भी विवाद
ज्ञापन में केदारनाथ, डंगवाड़ी (ऊखीमठ), जयबीरी, गुप्तकाशी, मक्कूमठ, करेखी, त्यूड़ी, अगस्त्यमुनि और तुंगनाथ क्षेत्रों में समिति की दर्जनों से लेकर सैकड़ों नाली भूमि पर अवैध कब्जे होने का दावा किया गया है। साथ ही सरकारी विभागों और शिक्षण संस्थानों द्वारा निर्माण किए जाने तथा कार्रवाई न होने के आरोप भी लगाए गए हैं।
दिल्ली और उत्तर प्रदेश की संपत्तियों का भी उल्लेख
दस्तावेज में लखनऊ के अमीनाबाद स्थित राधा-कृष्ण मंदिर एवं भवन, उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की कृषि भूमि तथा नई दिल्ली के आर.के. पुरम क्षेत्र में करीब दो बीघा भूमि और मंदिर पर भी कथित कब्जे के आरोप लगाए गए हैं।
धर्मशालाएं तोड़ीं, बसों का भी हिसाब नहीं
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि बदरीनाथ मास्टर प्लान के दौरान लगभग 12 धर्मशालाएं तोड़ दी गईं, लेकिन उनका मुआवजा मिला या नहीं, इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा मंदिर समिति की पांच डीलक्स बसों का भी कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध न होने का दावा किया गया है।
निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
ज्ञापन में इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराने, मंदिर समिति की संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने, किरायों की समीक्षा करने तथा कथित वित्तीय अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है। साथ ही वर्तमान पदाधिकारियों से इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की भी अपेक्षा जताई गई है।
(नोट: यह खबर शिकायती पत्र/ज्ञापन में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है तथा संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)



