
किसानों की नगदी फसलें मंडियों तक पहुंचाने में बढ़ी मुश्किलें, ग्रामीणों ने स्थायी समाधान की उठाई मांग
साहिया। मानसून के आगमन के साथ ही जौनसार-बावर क्षेत्र के प्रमुख मोटर मार्गों पर स्थित भूस्खलन जोन एक बार फिर सक्रिय होने लगे हैं। लगातार हो रही बारिश से कई स्थानों पर सड़कें दरकने लगी हैं, जिससे आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। इसका सबसे अधिक असर स्थानीय ग्रामीणों, स्कूली बच्चों, मरीजों और किसानों पर पड़ रहा है।
क्षेत्र में कालसी–चकराता मोटर मार्ग के जजरेड और सैवना बैंड, हरिपुर–कोटी–इच्छाड़ी–मीनस मोटर मार्ग के लाल ढाग और पाथुवा खेड़ा, साहिया–क्वानू मोटर मार्ग के कोठा बैंड और तारली खड्ड, तथा साहिया–समाल्टा मोटर मार्ग के पाटा बैंड सहित कई स्थान लंबे समय से संवेदनशील भूस्खलन जोन बने हुए हैं। बारिश शुरू होते ही इन स्थानों पर सड़क धंसने, मलबा आने और चट्टानें गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
इन दिनों क्षेत्र के किसान टमाटर, शिमला मिर्च, फ्रेंच बीन्स, अदरक और अन्य नगदी फसलों की तुड़ाई कर उन्हें स्थानीय मंडियों तक पहुंचा रहे हैं। ऐसे में खराब और असुरक्षित सड़कें किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई हैं। कई बार सड़क बंद होने या क्षतिग्रस्त होने के कारण समय पर फसल मंडी नहीं पहुंच पाती, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। साथ ही आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात भी प्रभावित होता है।
ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष मानसून से पहले इन भूस्खलन प्रभावित स्थलों के स्थायी उपचार की मांग की जाती है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर केवल अस्थायी व्यवस्था कर दी जाती है। परिणामस्वरूप हर बारिश में वही स्थिति दोबारा उत्पन्न हो जाती है और लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है।
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग, साहिया के अधिशासी अभियंता अनुज भारद्वाज ने बताया कि कालसी–चकराता मोटर मार्ग के जजरेड भूस्खलन जोन के स्थायी उपचार के लिए डीपीआर तैयार कर ली गई है। इसके अलावा अन्य छोटे-छोटे भूस्खलन प्रभावित स्थलों के लिए आपदा मद के अंतर्गत स्टिमेट तैयार कर शासन को भेजे जाएंगे। स्वीकृति मिलने के बाद आवश्यक सुरक्षा कार्य कराए जाएंगे।
ग्रामीण रणवीर सिंह चौहान, मोहन शर्मा, सतपाल चौहान, अतर सिंह तोमर, बलबीर सिंह चौहान, अमर सिंह तोमर, सुरेंद्र सिंह चौहान, दीवान सिंह तोमर, कुंवर सिंह चौहान, रमेश चौहान, सूरत सिंह चौहान और अजब सिंह चौहान सहित अन्य लोगों ने प्रशासन और शासन से मांग की है कि सभी संवेदनशील भूस्खलन जोनों का स्थायी उपचार शीघ्र कराया जाए, ताकि आम जनता, किसानों और यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके तथा मानसून के दौरान किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।




