देहरादून में महिला से दुष्कर्म और निर्मम हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास, डीएनए और दांतों के निशान बने सबसे बड़े सबूत

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देहरादून। राजधानी देहरादून में वर्ष 2023 में हुए महिला से दुष्कर्म और निर्मम हत्या के सनसनीखेज मामले में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट (पोक्सो)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंजू सिंह मुंडे की अदालत ने आरोपी राजेश (पुत्र मुन्नू, निवासी कैनाल रोड, बाड़ीघाट, राजपुर, देहरादून) को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी को महिला के साथ बलात्कार, हत्या और साक्ष्य छिपाने के अपराध में दोषसिद्ध माना। इस मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों, विशेषकर डीएनए रिपोर्ट और दांतों के निशानों ने आरोपी के खिलाफ अहम भूमिका निभाई।

कूड़ेदान के पास मिला था महिला का शव

अभियोजन के अनुसार 31 जुलाई 2023 की सुबह हाथीबड़कला क्षेत्र में सर्वे गेट के सामने स्थित एक कूड़ेदान के पास लगभग 36-37 वर्षीय अज्ञात महिला का शव संदिग्ध अवस्था में मिला था। नगर निगम के सफाई कर्मचारी शिव कुमार ने सबसे पहले शव को देखा और पुलिस को सूचना दी। महिला के सिर, चेहरे, गर्दन और छाती पर गंभीर चोटों के निशान थे। दून अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

सीसीटीवी फुटेज से खुला राज

घटना की जांच के दौरान तत्कालीन चौकी प्रभारी आशीष रावत ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में देर रात करीब तीन बजे एक व्यक्ति महिला के शव को घसीटते हुए सड़क पार कर कूड़ेदान के पास फेंकता हुआ दिखाई दिया। इसके बाद थाना डालनवाला पुलिस ने हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी राजेश को गिरफ्तार किया।

पोस्टमार्टम में सामने आई दरिंदगी

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला के चेहरे, गाल, होंठ, दोनों स्तनों और जांघों पर दांतों से काटे जाने के गंभीर निशान मिले। सिर के पिछले हिस्से में लगभग चार इंच गहरा घाव था। मृतका की बंद मुट्ठी में बाल भी मिले, जिससे संघर्ष के स्पष्ट संकेत मिले।

डीएनए और फोरेंसिक रिपोर्ट ने खोली सच्चाई

सुनवाई के दौरान आरोपी ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए झूठा फंसाए जाने का दावा किया। हालांकि, विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की डीएनए रिपोर्ट में मृतका के शरीर से मिले सीमेन का मिलान आरोपी के डीएनए से पूरी तरह हो गया। इसके अलावा मृतका के शरीर पर मिले दांतों के निशान भी आरोपी के दांतों के नमूनों से मेल खा गए। इन वैज्ञानिक साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष के मामले को पूरी तरह मजबूत कर दिया।

अदालत ने माना अपराध संदेह से परे सिद्ध

अदालत ने मौखिक, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार), 302 (हत्या) और 201 (साक्ष्य मिटाने) के आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा। इसके आधार पर आरोपी राजेश को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

अदालत के इस फैसले को जघन्य अपराधों के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। यह फैसला वैज्ञानिक जांच और फोरेंसिक साक्ष्यों की महत्ता को भी रेखांकित करता है तथा समाज में ऐसे अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश देता है।

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