जयवीर चौहान की नई हारूल ‘राजा महासू की हारूल’ में गूंजा चारों महासू महाराज का गुणगान

जौनसार-बावर की लोकसंस्कृति और देवपरंपराओं को गीत के माध्यम से किया प्रस्तुत, हनोल स्थित महासू देवता के दरबार में हुई शूटिंग

दून वैली टाइम्स | चकराता, देहरादून

जौनसार-बावर के युवा गीतकार एवं गायक जयवीर चौहान ने अपनी नई लोक रचना ‘राजा महासू की हारूल’ के माध्यम से चारों महासू महाराज की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया है। इस हारूल में जौनसार-बावर की समृद्ध लोकसंस्कृति, धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी देवपरंपराओं को गीत के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

चारों भाई महासू महाराज—बाशिक, बोठा, पवासी और चालदा महाराज को समर्पित इस रचना में उनके निवास स्थलों, शांठी-पांशी मुल्कों, चार वीरों, बाजीरों तथा महासू महाराज से जुड़ी विभिन्न देवपरंपराओं का वर्णन किया गया है। गीत के माध्यम से क्षेत्र की धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

इस गीत की खास बात यह है कि इसके गीतकार, संगीतकार और गायक स्वयं जयवीर चौहान हैं। संगीत प्रभु पंवार ने दिया है, जबकि गीत की शूटिंग महासू देवता के प्रसिद्ध दरबार हनोल में की गई है। हनोल स्थित महासू देवता का मंदिर जौनसार-बावर सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है।

जयवीर चौहान की यह रचना जौनसार-बावर की पारंपरिक हारूल गायन शैली को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। लोकगीतों के माध्यम से क्षेत्र की संस्कृति, इतिहास और धार्मिक परंपराओं को संरक्षित करने के साथ-साथ उन्हें व्यापक स्तर पर पहुंचाने में भी इस तरह की रचनाएं अहम भूमिका निभाती हैं।

‘राजा महासू की हारूल’ के जरिए जयवीर चौहान ने अपनी लोकसंस्कृति और महासू महाराज के प्रति आस्था को सुरों में पिरोकर प्रस्तुत किया है। यह रचना जौनसार-बावर की सांस्कृतिक पहचान को संगीत के माध्यम से आगे बढ़ाने का एक सराहनीय प्रयास है।

गीत सुनें और देखे : https://youtu.be/FyYgXE_R4IA?si=1I1eOKl9zz_HNQIQ

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