उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज, भटखोला के प्रभारी प्रधानाचार्य दयानंद टम्टा की हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस सनसनीखेज वारदात के बाद अब आरोपी वरिष्ठ सहायक नवल किशोर सोराड़ी के व्यवहार और उसकी गतिविधियों को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और किसी भी दावे की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी।
घटना से पहले चाकू लेकर स्कूल आने का दावा
स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि आरोपी पिछले करीब एक सप्ताह से चाकू लेकर विद्यालय आ रहा था। हालांकि इस संबंध में समय रहते पुलिस या प्रशासन को कोई औपचारिक शिकायत मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। घटना के बाद यह दावा जांच का अहम हिस्सा बन गया है और पुलिस इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है।
बताया जा रहा है कि आरोपी नवल किशोर सोराड़ी इससे पहले राजकीय इंटर कॉलेज बड़ियाकोट में तैनात था। करीब दो वर्ष पहले उसका स्थानांतरण पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज भटखोला में हुआ था।
आरोपी के व्यवहार को लेकर पहले से थीं चर्चाएं
ग्रामीणों और स्थानीय दुकानदारों के अनुसार आरोपी का व्यवहार सामान्य नहीं माना जाता था। लोगों का कहना है कि वह विद्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर कठपुड़ियाछीना मार्ग स्थित एरियागाड़ में किराये के कमरे में अकेला रहता था। आसपास के लोगों के अनुसार उसके व्यवहार के कारण कई लोग उसे अपने आसपास कमरा देने से भी कतराते थे।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि आरोपी कभी-कभी अलग तरह का पहनावा अपनाता था। सोशल मीडिया पर उसके पहनावे को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन इन दावों की अभी तक किसी भी आधिकारिक एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है। इसलिए इन बातों को फिलहाल केवल स्थानीय दावों के रूप में ही देखा जा रहा है।
दुकानदार से अंडे के दाम को लेकर हुई थी कहासुनी
स्थानीय दुकानदार कमल सिंह ने बताया कि घटना के बाद आरोपी उनकी दुकान पर अंडे खरीदने पहुंचा था। जब उन्होंने एक अंडे की कीमत नौ रुपये बताई तो आरोपी नाराज हो गया और कहने लगा कि उसके यहां अंडे चार रुपये में मिलते हैं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस भी हुई। दुकानदार का कहना है कि आरोपी प्रशासनिक अधिकारी (वरिष्ठ सहायक) के पद पर कार्यरत था, लेकिन उसका लोगों के साथ व्यवहार सामान्य नहीं था।
प्रधानाचार्य की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक
प्रभारी प्रधानाचार्य दयानंद टम्टा की हत्या के बाद खरेही पट्टी सहित पूरे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। ग्रामीणों और शिक्षकों ने उन्हें बेहद सरल, मिलनसार और कर्मठ शिक्षक बताया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।
घटना वाले दिन क्या हुआ?
स्थानीय लोगों के अनुसार शनिवार सुबह करीब सात बजे दयानंद टम्टा अपनी निजी कार से विद्यालय पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि कार में कुछ अन्य शिक्षक भी मौजूद थे। विद्यालय पहुंचने के बाद अन्य शिक्षक एक रास्ते से स्कूल की ओर चले गए, जबकि प्रधानाचार्य दूसरे रास्ते से विद्यालय की ओर बढ़े।
जिस स्थान पर उन पर हमला हुआ वह अपेक्षाकृत सुनसान क्षेत्र था और आसपास झाड़ियां होने के कारण घटना की जानकारी तत्काल किसी को नहीं मिल सकी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि उस दिन उन्होंने अलग रास्ता क्यों चुना।
हर पहलू की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। आरोपी के कथित व्यवहार, स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोप, घटना से पहले चाकू लेकर विद्यालय आने के दावे, कथित धमकियों तथा वारदात के समय की परिस्थितियों को जांच में शामिल किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हत्या के पीछे वास्तविक कारण क्या था और घटना से पहले सामने आए दावों का इस वारदात से कोई सीधा संबंध था या नहीं।
नोट: आरोपी के पहनावे, व्यवहार और अन्य व्यक्तिगत विशेषताओं को लेकर सामने आए दावे फिलहाल स्थानीय लोगों के कथन हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।




