ऋषिपर्णा नदी के पुनर्जीवन का श्रीगणेश: उद्गम से होगा जीर्णोद्धार, बार्लोगंज से काठबंगला तक 10 किमी क्षेत्र में शुरू होगी बड़ी मुहिम

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देहरादून, 23 जुलाई।
देहरादून की जीवनरेखा मानी जाने वाली ऋषिपर्णा (रिस्पना) नदी को पुनर्जीवित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ी पहल शुरू कर दी है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के नेतृत्व में नदी के उद्गम स्थल से इसके जीर्णोद्धार की कार्ययोजना पर काम शुरू हो गया है। पहले चरण में बार्लोगंज से काठबंगला तक लगभग 10 किलोमीटर क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है और इसके आधार पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है।

गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को समयबद्ध तरीके से कार्ययोजना को धरातल पर उतारने के निर्देश दिए।

“नदियां हमारी संस्कृति और सांसों की डोरी हैं”

बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि स्वच्छ और निर्मल नदियां केवल जल का स्रोत नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार भी हैं। उन्होंने कहा कि नदियों को प्रदूषण मुक्त रखना केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी जिम्मेदारी है।

पहले चरण में होंगे ये प्रमुख कार्य

प्रशासन की योजना के तहत नदी के ऊपरी क्षेत्र में भू-जल संरक्षण और जलधारा को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे। इनमें शामिल हैं—

  • छोटे-छोटे चेकडैमों का निर्माण।
  • बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान।
  • नदी तटों का सौंदर्यीकरण।
  • ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक निस्तारण।
  • स्रोत क्षेत्र को स्वच्छ एवं संरक्षित बनाना।

इसके अलावा साबरमती नदी पुनर्जीवन परियोजना में कार्य कर चुकी विशेषज्ञ टीम से तकनीकी सहयोग लेने का भी निर्णय लिया गया है। प्रशासन इस अभियान को जनभागीदारी आधारित “ग्रैंड अभियान” के रूप में चलाएगा, जिसमें स्वयंसेवी संस्थाओं और पर्यावरण मित्रों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

नगर निगम और नगर पालिका को मिले विशेष निर्देश

जिलाधिकारी ने नगर पालिका मसूरी को लालटिब्बा से शिखर फॉल तक तथा नगर निगम देहरादून को काठबंगला से डाउनस्ट्रीम क्षेत्र तक विशेष स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए।

वहीं सिंचाई विभाग को चेकडैम निर्माण और नदी तटों के सुदृढ़ीकरण के लिए जल्द से जल्द कंसल्टेंसी फर्म के साथ अनुबंध करने के निर्देश दिए गए।

सीवर और प्लास्टिक पर होगी सख्ती

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मैदानी क्षेत्रों में नदी में गिरने वाले सभी छोटे-बड़े नालों और सीवर के दूषित जल का उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही—

  • नदी में पहुंचने वाले ठोस कचरे को रोकने के लिए जालियां लगाई जाएंगी।
  • सिंगल यूज प्लास्टिक के पृथक्करण (सेग्रीगेशन) की व्यवस्था की जाएगी।
  • नदी में कूड़ा फेंकने वालों के खिलाफ चालान और सख्त कार्रवाई होगी।
  • लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जाएगा।

चिन्हित हो चुके हैं गारबेज प्वाइंट

बैठक में नगर निगम, नगर पालिका, सिंचाई एवं वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नदी में गिरने वाले सभी छोटे-बड़े नालों और गारबेज प्वाइंट्स का चिन्हांकन पूरा हो चुका है। डम्पिंग साइट चयन के बाद बजट तैयार किया जा रहा है। साथ ही नदी के ऊपरी क्षेत्र में चेकडैम निर्माण और डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, अधीक्षण अभियंता संजय राय सहित वन, सिंचाई, नगर निगम और नगर पालिका के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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