देहरादून। देहरादून की विशेष अदालत ने 12 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के मामले में आरोपी मनोज कुमार को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि FSL की DNA रिपोर्ट, मेडिकल साक्ष्य और स्कूल के एसआर (Scholar Register) रजिस्टर ने आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित कर दिया।
मामले की शुरुआत 28 फरवरी 2025 को हुई थी, जब पीड़िता के पिता ने थाना बसंत विहार में अपनी बेटी की गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन दिन बाद उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के पास एक गांव से बालिका को सकुशल बरामद कर लिया।
जांच में सामने आया कि आरोपी मनोज कुमार बालिका को बहला-फुसलाकर देहरादून आईएसबीटी से बस के जरिए अलीगढ़ स्थित अपनी बहन के घर ले गया, जहां उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया।
सैनेटरी पैड से मिले DNA ने खोला सच
मुकदमे के दौरान सबसे अहम साक्ष्य फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की DNA रिपोर्ट रही। पीड़िता के सैनेटरी पैड से मिले मिश्रित DNA का आरोपी के रक्त नमूने से मिलान कराया गया, जो पूरी तरह मेल खा गया। अदालत ने इस वैज्ञानिक साक्ष्य को दोषसिद्धि का सबसे मजबूत आधार माना।
स्कूल के एसआर रजिस्टर ने साबित की उम्र
अभियोजन पक्ष ने स्कूल के Scholar Register (SR) और जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर साबित किया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र लगभग 12 वर्ष थी। अदालत ने इसे भी महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य माना।
7 गवाहों ने मजबूत किया अभियोजन पक्ष
ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, उसके पिता, मेडिकल परीक्षण करने वाली चिकित्सक, स्कूल शिक्षिका और विवेचक सहित 7 महत्वपूर्ण गवाह पेश किए। सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।




