एम्स में उपचार के दौरान ली अंतिम सांस, 5 साल के बेटे के सिर से उठा पिता का साया
चमोली। उत्तराखंड के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। सीआरपीएफ में तैनात जवान गजेंद्र कुमार का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। पिछले करीब चार महीनों से उनका स्वास्थ्य खराब चल रहा था और उनका उपचार एम्स में किया जा रहा था। उपचार के दौरान मंगलवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। जवान के निधन की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया, जबकि उनके पैतृक क्षेत्र और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई।
मूल रूप से रुद्रप्रयाग जिले के जखोली ब्लॉक के जखनियाला गांव निवासी 29 वर्षीय गजेंद्र कुमार, स्वर्गीय गिरधारी लाल के पुत्र थे। वह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में जवान के पद पर तैनात थे। वर्तमान में उनका परिवार चमोली जिले के पटियालाधार क्षेत्र में निवास करता था, जबकि उनकी तैनाती देहरादून में थी।

चार महीने से चल रहा था उपचार
बताया जा रहा है कि करीब चार महीने पहले गजेंद्र कुमार की तबीयत खराब हुई थी। इसके बाद उनका उपचार लगातार चल रहा था। परिजनों को उम्मीद थी कि इलाज के बाद वह स्वस्थ होकर जल्द ही घर लौटेंगे और परिवार के बीच खुशियां फिर लौट आएंगी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
मंगलवार को एम्स में उपचार के दौरान गजेंद्र कुमार ने दम तोड़ दिया। जवान की मौत की सूचना मिलते ही उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पत्नी, मां और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही मचा कोहराम
जवान गजेंद्र कुमार का पार्थिव शरीर उनके आवास पर पहुंचा तो पूरे माहौल में मातम पसर गया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और क्षेत्र के लोग पहुंचे। हर आंख नम थी और हर कोई परिवार को ढांढस बंधाता नजर आया।
गजेंद्र कुमार के निधन से उनके परिवार ने अपना एक मजबूत सहारा खो दिया है। सबसे अधिक दर्दनाक स्थिति उनके पांच वर्षीय बेटे की है, जिसने कम उम्र में ही अपने पिता को खो दिया। मासूम बेटे के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया।
सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
गमगीन माहौल के बीच सीआरपीएफ जवान गजेंद्र कुमार का अंतिम संस्कार चमोली घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। अंतिम विदाई के दौरान सीआरपीएफ जवानों और स्थानीय लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं।
गजेंद्र कुमार की असमय मौत ने परिवार के साथ-साथ उनके परिचितों और क्षेत्रवासियों को भी झकझोर कर रख दिया है। महज 29 वर्ष की उम्र में देश की सेवा करते हुए उनका यूं दुनिया से चले जाना परिवार के लिए कभी न भर पाने वाला दुख है।
परिवार में पसरा मातम
गजेंद्र कुमार के निधन के बाद उनकी मां और पत्नी गहरे सदमे में हैं। परिवार के लोगों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि गजेंद्र उपचार के बाद ठीक होकर वापस घर लौटेंगे, लेकिन उनका इंतजार कभी खत्म नहीं हुआ। पांच वर्षीय बेटे की ओर देखते हुए परिवार की आंखों से आंसू थम नहीं रहे हैं।
देश की सेवा में तैनात एक जवान का असमय निधन पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। अंतिम विदाई के दौरान लोगों ने जवान गजेंद्र कुमार के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और ईश्वर से शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में शक्ति देने की प्रार्थना की।
