उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई, सहायक प्रोफेसर गिरफ्तार

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देहरादून | दून वैली टाइम्स

उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) की परीक्षा प्रणाली से जुड़े कथित पेपर लीक मामले में देहरादून पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक सहायक प्रोफेसर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने परीक्षा से पहले छात्रों के साथ महत्वपूर्ण प्रश्न साझा किए थे, जिनमें से कई प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की है।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान आशीष कुमार गुप्ता के रूप में हुई है, जो शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, देहरादून में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है। आरोपी मूल रूप से शाकुम्भरी विहार, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) का निवासी बताया गया है।

ई-मेल शिकायत से खुला मामला

पुलिस के अनुसार, 8 जुलाई को वीर माधव सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय को एक ई-मेल प्राप्त हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 3 जुलाई को सहायक प्रोफेसर ने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से छात्रों के साथ परीक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न साझा किए थे। परीक्षा समाप्त होने के बाद जब इन प्रश्नों का वास्तविक प्रश्नपत्र से मिलान किया गया तो कई प्रश्नों में समानता पाई गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंतरिक जांच समिति गठित कर जांच शुरू की, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।

आंतरिक जांच में भी सामने आए अहम तथ्य

विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच में भी यह बात सामने आई कि आरोपी सहायक प्रोफेसर ने परीक्षा से पहले छात्रों को परीक्षा से संबंधित समान प्रश्न उपलब्ध कराए थे। पुलिस जांच के अनुसार, ये प्रश्न छात्रों के साथ आंतरिक पोर्टल और व्हाट्सएप के माध्यम से साझा किए गए थे। आरोप है कि इस कृत्य से कुछ छात्रों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया और विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता प्रभावित हुई।

परीक्षा नियंत्रक की तहरीर पर दर्ज हुआ मुकदमा

23 जुलाई को विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनय कुमार पटेल ने प्रेमनगर कोतवाली में लिखित तहरीर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316, 318(4) और 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया।

साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर गिरफ्तारी

एसएसपी देहरादून के निर्देश पर पुलिस ने मामले की गहन जांच की। जांच के दौरान गवाहों के बयान, विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया गया।

पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित प्रश्न साझा करने की पूरी प्रक्रिया में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा इससे कितने छात्रों को लाभ मिला। मामले की जांच जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और गोपनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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