यमकेश्वर के देवराना गांव की घटना, ग्रामीणों के शोर से जंगल की ओर भागा गुलदार; वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी

पौड़ी गढ़वाल | Doon Valley Times
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर ब्लॉक में एक बार फिर गुलदार का आतंक देखने को मिला है। देवराना गांव में रविवार शाम बकरी को बचाने की कोशिश कर रही एक महिला पर गुलदार ने हमला कर दिया। हमले में महिला के पैर पर पंजे लगने से वह घायल हो गई। आसपास मौजूद महिलाओं और ग्रामीणों के शोर मचाने पर गुलदार जंगल की ओर भाग गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
बकरी को बचाने के दौरान हुआ हमला
जानकारी के अनुसार देवराना गांव निवासी उर्मिला देवी रविवार शाम जंगल से मवेशियों को चराकर घर लौट रही थीं। इसी दौरान एक गुलदार ने उनकी बकरी पर झपट्टा मार दिया। बकरी को बचाने के लिए उर्मिला देवी ने शोर मचाया, लेकिन तभी गुलदार उनकी ओर लपका और उनके पैर पर पंजों से हमला कर दिया। महिला के शोर की आवाज सुनकर आसपास मौजूद अन्य महिलाएं और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।
ग्रामीणों की सतर्कता से टला बड़ा हादसा
महिलाओं और ग्रामीणों ने जोर-जोर से शोर मचाते हुए गुलदार को भगाने का प्रयास किया। लोगों की भीड़ और आवाजाही बढ़ती देख गुलदार जंगल की ओर भाग गया। ग्रामीणों की तत्परता से महिला की जान बच गई और एक बड़ा हादसा टल गया। घायल महिला को तुरंत उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें घर भेज दिया। उनकी हालत फिलहाल सामान्य बताई जा रही है।
ग्रामीणों में दहशत, पिंजरा लगाने की मांग
घटना के बाद देवराना और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से गुलदार आबादी के आसपास लगातार दिखाई दे रहा है, जिससे लोगों में भय बना हुआ है। उन्होंने वन विभाग से क्षेत्र में तत्काल पिंजरा लगाने, नियमित गश्त बढ़ाने और गुलदार को पकड़ने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है।
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र में गश्त शुरू कर दी। लालढांग रेंज के वन क्षेत्राधिकारी अनुराग जोशी ने बताया कि गुलदार की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और उसे पकड़ने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे जंगल में अकेले न जाएं और यदि कहीं गुलदार या कोई अन्य वन्यजीव दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें।
लगातार बढ़ रही गुलदार की गतिविधियों ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं।




