दून वैली टाइम्स | विकासनगर/देहरादून | 27 जुलाई
देहरादून जिला प्रधान संगठन ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर सोमवार को जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से शासन को 10 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 1 अगस्त 2026 से जिले के ग्राम प्रधान धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे।

जिला प्रधान संगठन का कहना है कि पिछले छह माह से विभिन्न माध्यमों से शासन और संबंधित अधिकारियों के समक्ष लगातार अपनी मांगें रखी जा रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रदेशभर के ग्राम प्रधानों में गहरा आक्रोश है। संगठन का आरोप है कि ग्राम पंचायतों को मजबूत बनाने और पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकार बढ़ाने की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
ये हैं संगठन की प्रमुख मांगें
ज्ञापन में ग्राम प्रधानों के लिए न्यूनतम ₹20 हजार प्रतिमाह मानदेय निर्धारित करने की मांग की गई है। साथ ही ग्राम पंचायत वार्ड सदस्यों को भी उनके दायित्वों के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय दिए जाने की मांग उठाई गई।
संगठन ने कहा कि ग्राम पंचायतों को जनसंख्या और भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर केंद्रीय एवं राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि बढ़ाई जाए, ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके। इसके अलावा विभिन्न विभागों द्वारा ग्राम पंचायत क्षेत्रों में कराए जाने वाले विकास कार्यों में ग्राम प्रधानों की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित करने और जिला योजना समिति की बैठकों में प्रधान संगठन के प्रतिनिधियों को शामिल करने की भी मांग की गई।
ज्ञापन में पंचायतों को संविधान के अनुरूप 29 विभागों के अधिकार हस्तांतरित करने, ग्राम प्रधान निधि की व्यवस्था लागू करने तथा ग्राम पंचायतों के माध्यम से ₹10 लाख तक के विकास कार्य कराने की अनुमति देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
इसके साथ ही ग्राम प्रधानों के लिए स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा की सुविधा उपलब्ध कराने, ग्राम पंचायतों में उपप्रधान का पद समाप्त करने तथा मनरेगा एवं वीबीजीआरएएमजी योजना के तहत श्रमिकों की उपस्थिति ऑफलाइन दर्ज करने और मजदूरों को न्यूनतम ₹600 प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।
आंदोलन की दी चेतावनी
जिला प्रधान संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो 1 अगस्त 2026 से जिला प्रधान संगठन देहरादून चरणबद्ध धरना-प्रदर्शन शुरू करेगा। संगठन ने कहा कि आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
संगठन का कहना है कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं और यदि पंचायत प्रतिनिधियों को पर्याप्त अधिकार, संसाधन और सम्मान नहीं मिलेगा तो ग्रामीण विकास प्रभावित होगा। इसलिए सरकार को जल्द से जल्द उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।




