नई टिहरी/देहरादून। उत्तराखंड में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और मौसम विभाग लगातार भारी बारिश तथा भूस्खलन की चेतावनी जारी कर रहा है। ऐसे समय में निर्माणाधीन लखवाड़ जलविद्युत परियोजना में निर्माण कार्य जारी रहने से सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बीती रात हुई भारी बारिश के दौरान पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा परियोजना क्षेत्र में आ गया, जिसकी चपेट में आकर साइट पर खड़ी कई बड़ी मशीनें और एक डंपर दब गए। घटना के बाद परियोजना क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस घटना में किसी श्रमिक के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन यह हादसा एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
स्थानीय लोगों और परियोजना से जुड़े कुछ श्रमिकों का आरोप है कि मानसून के दौरान लगातार भूस्खलन का खतरा होने के बावजूद निर्माण कार्य नहीं रोका गया। उनका कहना है कि परियोजना का निर्माण कार्य कर रही एलएंडटी कंपनी जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में भी काम जारी रखे हुए है, जिससे श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो रही हैं।
बताया जा रहा है कि दो दिन पहले भी इसी परियोजना क्षेत्र में एक मशीन ऑपरेटर बाल-बाल बच गया था। उस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन ताजा घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या संभावित जोखिमों का सही आकलन किया गया और क्या सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन कराया गया।
यह मामला केवल निर्माण कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि परियोजना की निगरानी कर रहे संबंधित सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़े करता है। जब पूरे प्रदेश में संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बरतने और आवश्यकतानुसार कार्यों पर रोक लगाने के निर्देश दिए जा रहे हैं, तब लखवाड़ जैसी संवेदनशील परियोजना में निर्माण कार्य किन परिस्थितियों में जारी रखा गया? यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि श्रमिकों की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से दिशा-निर्देश जारी किए गए थे और उनका पालन किस स्तर तक सुनिश्चित किया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मशीनें क्षतिग्रस्त होने पर उन्हें बदला जा सकता है, लेकिन यदि किसी श्रमिक की जान चली जाती तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता? उनका मानना है कि किसी भी विकास परियोजना में मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का भी कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में मानसून के दौरान भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में सभी निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन, जोखिम का नियमित आकलन और मौसम की परिस्थितियों के अनुसार कार्य संचालन आवश्यक है। अन्यथा भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल इस मामले में संबंधित विभागों और निर्माण कंपनी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।




