जिला बदर ही रहेगा बिल्डर पुनीत अग्रवाल, नहीं मिली राहत; कमिश्नर कोर्ट ने मांगे सभी दस्तावेज

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देहरादून। एटीएस कॉलोनी से जुड़े चर्चित बिल्डर पुनीत अग्रवाल को जिला बदर मामले में फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। कमिश्नर कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए मामले से जुड़े सभी दस्तावेज तलब किए हैं। अब अभिलेखों और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद ही यह तय होगा कि जिला बदर का आदेश बरकरार रहेगा या उसमें कोई बदलाव किया जाएगा।

पुनीत अग्रवाल को पहले जिला प्रशासन ने उत्तराखंड गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत छह माह के लिए जिला बदर किया था। प्रशासन का कहना था कि उनकी गतिविधियां कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति के लिए खतरा बन रही थीं। इसी कार्रवाई के तहत उनका शस्त्र लाइसेंस भी निरस्त कर दिया गया था।

डीआरडीओ वैज्ञानिक के परिवार से मारपीट बना कार्रवाई का प्रमुख आधार

प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार 13 अप्रैल को एटीएस कॉलोनी में डीआरडीओ से जुड़े एक वैज्ञानिक के परिवार के साथ मारपीट की घटना हुई थी। आरोप है कि पहले वैज्ञानिक के माता-पिता के साथ अभद्रता की गई और विरोध करने पर वैज्ञानिक को परिसर में बुलाकर सहयोगियों के साथ हमला किया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। पीड़ित के कान का पर्दा फटने का भी आरोप है। इस मामले में महिलाओं और बुजुर्गों के साथ अभद्र व्यवहार करने के आरोप भी लगाए गए और रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ।

दीपावली पर बच्चों के सामने पिस्टल लहराने का मामला भी बना आधार

प्रशासन के संज्ञान में वर्ष 2025 की दीपावली के दौरान कॉलोनी में बच्चों के सामने लाइसेंसी पिस्टल लहराने का मामला भी आया था। जिलाधिकारी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पहले शस्त्र लाइसेंस निलंबित किया, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया। इसके बाद जिला बदर की कार्रवाई अमल में लाई गई।

पांच आपराधिक मुकदमों का रिकॉर्ड

प्रशासनिक अभिलेखों के मुताबिक पुनीत अग्रवाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में पांच आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें डीआरडीओ वैज्ञानिक से मारपीट, आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों को धमकाने, नशे की हालत में उत्पात मचाने, बच्चों पर पिस्टल तानने, गाली-गलौज, वाहन से टक्कर मारने का प्रयास तथा जमीन पर कब्जा करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

बचाव पक्ष ने क्या कहा?

बचाव पक्ष का कहना है कि उनके खिलाफ दर्ज कुछ पुराने मुकदमे समाप्त या खारिज हो चुके हैं। इसलिए जिला बदर के आदेश पर पुनर्विचार करते हुए उन्हें राहत दी जानी चाहिए। हालांकि कमिश्नर कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी और सभी संबंधित दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं।

कॉलोनी में वर्षों से विवादों में रहा नाम

एटीएस कॉलोनी के निवासियों का आरोप है कि वर्ष 2021 से पुनीत अग्रवाल का व्यवहार लगातार आक्रामक रहा। समय-समय पर हुए विवादों के चलते उनके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हुए। कुछ मामलों में उनकी पत्नी पर भी अभद्रता के आरोप लगाए गए हैं और विभिन्न एफआईआर में उनका भी उल्लेख है।

अवैध निर्माण और जमीन कब्जाने के आरोप

मारपीट और अभद्रता के मामलों के अलावा बिल्डर पर अवैध निर्माण और सरकारी जमीन पर कब्जा करने जैसे आरोप भी लगे हैं। विभिन्न स्तरों पर हुई जांच में इन आरोपों की पुष्टि होने की बात भी सामने आई है।

पहले भी हुई थी कार्रवाई

जिला बदर से पहले प्रशासन उनके खिलाफ कई कदम उठा चुका था। शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया गया था और एटीएस सोसाइटी की आमसभा में उनकी सदस्यता भी समाप्त कर दी गई थी।

अब सभी दस्तावेजों की जांच के बाद कमिश्नर कोर्ट अगली सुनवाई में यह तय करेगा कि जिला बदर का आदेश यथावत रहेगा या आरोपी को कोई राहत दी जाएगी।

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