मांगें नहीं मानी गईं तो विकास कार्य ठप करने का ऐलान, 2027 चुनाव के बहिष्कार तक की दी चेतावनी
दून वैली टाइम्स | देहरादून
देहरादून जनपद के विकासखंड चकराता, कालसी और विकासनगर के ग्राम प्रधानों ने वीबीजीआरजी (VBGRG) नियमों के विरोध में शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तीनों विकासखंडों के प्रधान संगठनों ने अपने-अपने खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) के माध्यम से शासन को ज्ञापन भेजकर चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो सभी ग्राम प्रधान सामूहिक रूप से कार्य बहिष्कार करेंगे। इतना ही नहीं, कुछ प्रधानों ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के बहिष्कार तक की चेतावनी भी दी है।

ग्राम प्रधानों का कहना है कि वीबीजीआरजी के तहत लागू किए गए नए नियम और तकनीकी प्रावधान ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं हैं। इन नियमों के कारण ग्राम पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन संभव नहीं हो पा रहा है।

प्रधान संगठन का कहना है कि अधिकांश ग्राम पंचायतें दुर्गम एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद विकास कार्यों के भुगतान और श्रमिकों की उपस्थिति जैसी प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे ग्राम पंचायतों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

ज्ञापन में ग्राम प्रधानों ने प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि ₹5 लाख तक के विकास कार्यों के भुगतान की व्यवस्था ऑफलाइन मोड में की जाए, ताकि छोटे विकास कार्य बिना तकनीकी बाधाओं के समय पर पूरे हो सकें। इसके अलावा फेस मैपिंग (फेस ऑथेंटिकेशन) की अनिवार्यता समाप्त करने की भी मांग की गई। प्रधानों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी संसाधनों और नेटवर्क की कमी के कारण फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज कराना व्यावहारिक नहीं है, जिससे मजदूरों को भुगतान में भी परेशानी हो रही है।
प्रधान संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि शासन उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लेता है तो विकासखंड चकराता, कालसी और विकासनगर के सभी ग्राम प्रधान सामूहिक रूप से कार्य बहिष्कार करेंगे। ऐसी स्थिति में ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप होने की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान और प्रधान संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर सरकार से ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियमों में संशोधन करने की मांग की।
प्रधानों ने कहा कि उनका उद्देश्य विकास कार्यों को रोकना नहीं, बल्कि उन्हें सरल और व्यवहारिक बनाना है ताकि गांवों का विकास बिना किसी तकनीकी बाधा के आगे बढ़ सके।




